the village life – गाँव के किस्से

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the village life बस भीड़ से खचाखच भरी पड़ी थी। मेरी किस्मत अच्छी थी, अगर मैं 10 मिनट और देर करता तो इस खचाखच सी भरी बस में खड़े-खड़े ही जाना पड़ता। मेरी ममेरी बहन जो कि थोड़ी बीमार थी, मेरी जिम्मेदारी थी उन्हें उनके ससुराल पहुंचाने की। एक घंटे की यात्रा हो चुकी थी की तभी अचानक मेरे सीट के पीछे एक युवक की फोन में बातचीत सुनकर मैं हैरान सा रह गया। जब उसने कहा – घर पहुँचने बाले हैं मुर्गा काट कर तैयार रखना। the village

दरअसल गाँव के लोग प्राय जब भी किसी मेहमान के घर जाते हैं तो मुर्गा खाने की माँग जरूर करते हैं। बस में चढ़ने से पहले मेरे जीजा जी ने मुझसे फोन में कहा – जल्दी घर आइये मेरा, आपके लिए मुर्गा काट के रखे हैं। 2 घंटे की यात्रा के बाद मैं उनके घर पहुँचा। आस पास के कुछ घर अब भी कच्चे मिट्टी के बने हुए थे। जो की इस गाँव का काफी बेहतरीन नजारा था। चिकन चावल खाने के बाद मैंने २ घंटे आराम किए और अपने शरीर को सुकून महसूस कराया। इस छोटी सी गाँव में भी इलेक्ट्रिसिटी की स्थिति अच्छी थी।

govrnment scheme in village -village life

अब मैं विश्वास कर सकता हूँ की हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “सौभाग्य योजना” अपनी प्रगति में था। इलेक्ट्रिसिटी लगभग पुरे गाँव में पहुँच चुकी थी। जिसके कारण अब गाँव के लोगों का वातावरण व आदतें बदल चुकी हैं। जहाँ पहले अँधेरे की वजह से गाँव के लोग शाम के 7 बजे तक खाना पीना खाकर सो जाय करते थे, वहीँ अब लोग अच्छी बिजली मिलने से शहर के वातावरण में ढल गए हैं।

घर घर शौचालय बन जाने की वजह से अब इस गाँव को खुले में शौच से मुक्ति मिल गयी है। वर्त्तमान सरकार की वजह से गाँव के लोगों को काफी रहत मिली है। लेकिन उनकी सोच अब भी वैसी ही है, जैसे पहले थी। बहुत सारे गाँव के लोग अब भी भूत-प्रेत, आत्मा, डायन के भ्रम में फंसे हुए हैं।

मेरी ममेरी बहन जो की बीमार थी ,अगले दिन उसने अपने पति को बाजार से कबूतर लाने का आर्डर दिया। क्यूँकि मैने कभी इससे पहले कबूतर का मांस नहीं खाया था। गाँव के लोग मीट या मछली खिलाकर ही अपने मेहमानों का स्वागत करे हैं और कुछ मेहमान ऐसे होते हैं, अगर उनका स्वागत मीट या मछली से न करो तो इसे वो अपना अपमान समझते हैं। मेरे मना करने के बावजूद जीजा जी मुझे बाजार की तरफ ले गए।

गाँव की बाजार

मैंने देखा बाजार में कुछ लोग एक लाइन में कबूतर और मुर्गा बेच रहे थे। मैंने कबूतर को अपने हांथों से पकड़ा। कबूतर रंग बिरंगे, छोटे व बड़े प्यारे थे। मैं सोच रहा था लोग इतने नन्हे से पक्षी कपो भी आग में पकाकर खा जाते हैं?
जीजा जी कबूतर की जगह मुर्गा ले लीजिये। मैंने कहा।
अरे खाकर तो देखिये न कबूतर का मीट, मुर्गा फ़ैल है इसके सामने। जीजा ने कहा।
नहीं चिकेन ही ले लीजिये, दुबारा मैंने कहा।
मेरे मना करने के बाद जीजा ने 1.5 किलो का मुर्गा तौलाया।

village food – the villge life

आज मछली लेकर आइये मेरे भाई के लिए ,दीदी ने अपने अपने पति को आर्डर देते हुए कहा।
नहीं साधारण खाना ही बनाइये कोई! दीदी आपको इन्फेक्शन है पेट में, तेल और मसाले वाले खाने से परहेज कीजिए! जरुरी नहीं की रोज मुर्गा और मछली से ही मेरा स्वागत किया जाए!दुनिया में बहुत कुछ है खाने को जैसे की दूध, पनीर, मशरूम फल व् हरे सब्जियाँ, ये सब शुध खाना है! ये सब ज्यादा मात्रा में खाइए! लेकिन आप लोग प्राय मीट और मछली ही खाने पे जोर देते हैं, इसलिए दीदी को इफेक्शन है।

नहीं बिकास बाबू गाँव में से ही किसी ने नज़र लगा दिया है, जीजा ने कहा।
हाँ बिकास कोई नज़र लगा दिया है, इतना दिन से दवा खा रहे हैं फिर भी बिमारी नहीं छूट रहा है। दीदी ने भी कहा।
झाड़ फूंक करवा देंगे तो सब ठीक हो जाएगा, जीजा ने कहा। मैं हैरान रह गया इनकी बातें सुनकर। डॉक्टर से ज्यादा झाड़ फूंक वाले बाबा को तवज्जो दिया जा रहा था।

गाँव में डायन का प्रकोप

प्रत्येक गाँव में ये जरूर सुनने को मिलता था, कि उसकी माँ डायन है तो उसकी दादी व नानी डायन है। डायन अपने पड़ोस के लोगों को मार देती है अपने परिवार के सदस्य को भी डस लेती है। गाँव में सभी लोग इसकी चर्चा करते रहते थे। बचपन में हमें ये सब अफवाहों को स्वीकार करना पड़ता था। लेकिन इस उम्र में ये सब बातें किसी बकवास से कम नहीं लगती थी।

अफवाहें सुनने के बाद मेरी बहुत इच्छा हुई की इस अफवाह वाली डायन से जाकर मिलूँ। गाँव के लोगों से और अपने परिवार से बात करने के बाद मुझे पता चला कि गाँव के घर से दूर एक अलग घर में वो रहती थी। मैंने सबके सामने उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की। गाँव वाले ने मेरा विरोध किया। दीदी और जीजा ने भी मुझे डांटा, लेकिन मैंने अपनी इच्छा को उत्साह में तब्दील किया। और गाँव वालों की भ्रम को दूर करने के लिए उस अफवाह वाली डायन से मिलने उनके घर को गया। एक छोटी सी मिट्टी की बनी झोपड़ी थी , जिसमें एक बूढी सी औरत खटिया में लेती हुई थी।

बूढी औरत से बातचीत

दादी! मैंने पुकारा। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।ओ दादी! दुबारा मैंने जोर से पुकारा। इस बार वो बूढ़ी औरत ने अपनी आंखे खोली और मुझे ध्यानपूर्वक देखने लगी। दादी मुझे एक ग्लास पानी मिलेगा? मैंने लोकल भाषा में कहा। बूढ़ी औरत धीरे धीरे खाट से उतरी और सामने पड़े बाल्टी से एक ग्लास पानी निकालकर मुझे दिया। दादी मां घर में कोई और नहीं दिख रहा है? पानी पीने के बाद उनसे पूछा। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और दुबारा से उस खटिये में लेट गई।

दादी आपका परिवार कहां है? आपके बच्चे और बहू? मैंने दुबारा पूछा? बेटा मर गया, सब खत्म, उन्होंने कहा! मुझे पीढ़ा हुई उनकी बातें सुनकर, दुबारा मैंने हिम्मत नहीं की उनसे आगे कुछ और पूछने को! गांव वालों द्वारा दिए गए जख्मों को मैं और जख्म नहीं देना चाहता था! ऐसे ही गांव वालों ने अनपर आरोप जड़ दिया था, कि पहले उसने अपने पति को मारा! बाद में अपने बेटे को इसलिए उनकी बहू अपने बच्चो को लेकर घर छोड़कर जा चुकी थी! तब से लोग उन्हें डायन मानने लगें! और तब से कोई भी उनके परिवार से उनको देखने तक नहीं आता था!

गाँव में ही डायन क्यूँ ?? village culture

उस बूढ़ी औरत की बेटी भी इस समाज के भ्रम की शिकार थी! वो भी अपने मां से मिलने कभी नहीं आयी। आखिर कोई मां अपने ही बेटे को क्यों मारेगी?? जिसको उन्होंने अपने सीने से पाला हो! कैसे ये डायन शब्द इस समाज में फैला! कुछ और भी कारण ही सकते हैं, उनके पति और बेटे की मौत के! हो सकता है कि कोई बीमारी की वजह से उनकी मौत हुई थी! क्यूंकि गांव में सही डॉक्टर न मिल पाने की वजह से भी गरीब लोगों की बीमारी में मौत हो जाती है!

कुछ गांव वालों की लापरवाह भी होती है! जब वे थोड़े से भी बीमार पड़ेंगे! चाहे सर दर्द हो या पर दर्द तुरंत इंजेक्शन लेने कि होड़ में रहेंगे! वे ऐसे बर्ताव करेंगे मानो बहुत बीमारी हो गई है! अगर बीमारी जल्दी ठीक न हो तो शहर में अच्छे डॉक्टर को दिखाने की बजाय किसी झाड़ फूंक वाले की शरण में चले जाएंगे! जब उनसे पूछा जाएगा कि उन्हें क्या हुआ है? तब वे कहेंगे गांव में किसी ने नजर लगा दिया है, किसी डायन ने मंतर फूंक दिया है।

हैलो, दोस्तों ये थे मेरे छोटे से पल को मैंने एक गांव में गुजारे थे! इस गांव के हर एक चीज़ों के में बारिके से अनुभव किया किया और आपके सामने पेश किया! अगर आपको मेरी ये छोटी सी गांव की सच्चाई अच्छी लगी, तो कृपया कमेंट कर अपनी राय दें।

धन्यवाद!!

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5 Replies to “the village life – गाँव के किस्से”

  1. Achi story thi Bhai or 1 sachai bhi thi village main log Ye dayn parth Bahut mante hai isliye isko khatam Karna chaiye I like this story.. Keept up bro

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