बिहार में सरकारी नौकरी का महत्व

sarkari job 2019

हैलो, दोस्तों स्वागत है आपका मेरे ब्लॉग पर आज मैं बड़ा ही मजेदार विषय- “बिहार में सरकारी नौकरी(sarkari naukri) का महत्व” आपके सामने पेश कर रहा हूँ। अगर आपको भी लगता है, आपके शहर, गाँव या आपके परिवार में सरकारी नौकरी को एक विशेष महत्व दिया जाता है, जैसा की इस आर्टिकल में बताया जा रहा है, तो कमेंट कर अपना अनुभव जरूर शेयर करें।

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सरकारी नौकरी सलाह

बेटा अपनों-अपनों नौकरी ले, दुनिया में कोई केकरो न होय छे। भाई कुंवारा छे, तब एक भाई भाई रहे छे। एक बार मालकिन पधार गई तो तो कोई भाई अपनों न होय छे इसलिए बेटा कोनो नौकरी मिले तो करी लिए। चाहे ग्रुप डी. के ही नौकरी मिले तो करि लिए, नौकरी से बढ़कर दुनिया में कुछऊ नाय छे। नौकरी मिली गईले तो समझ ले भगवान् मिली गईले। इसिलए बेटा जल्दी कोई नौकरी निकाल। मेरी नानी ने लोकल भाषा में कहा। मैं हैरान रह गया, ये सब सुन कर और ख़ास कर के “कोनो नौकरी मिले तो कर लिए” इस शब्द से तो मैं और भी हैरान था।

सलाह 2

अगले दिन मैं अपने मामा के साथ गाँव की सड़क में टहल रहा था। तब एक अधेड़ उम्र के शख्स ने मुझे ध्यानपूर्वक देखा और मेरे बारे में पूछा ।
भांजा है मेरा पटना में रहकर सरकारी नौकरी का तैयारी करता है। मामा ने बताया।
वाह ! वाह ! बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया, उस शख्स ने उत्साह के साथ कहा। उनकी उत्साह देखकर मुझे फिर हैरानी हुई। नौकरी से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है! अंतिम में उसने ये शब्द भी जोड़े।

ये कोई नयी बात नहीं थी, दरअसल हर कोई बिहार में सरकारी नौकरी को ही प्राथमिकता देते हैं। गाँव हो या शहर किसी की भी सरकारी नौकरी लग जाए तो उनका सम्मान बढ़ जाता। चाहे वो कोई भी नौकरी हो बिहार पुलिस या रेलवे ग्रुप डी। अगर कोई भी ये नौकरी पास कर ले तो उसकी समाज में बड़ी वाह-वाही होती थी। अरे फलना का बेटा ग्रुप डी निकाला, अरे तेरा दोस्त बिहार पुलिस निकाला ! ये खबर आग की तरह फैलने में देर नहीं लगती। वही कोई अगर बिज़नेस की बात करे तो उसे तबज्जो नहीं दिया जाता था। और ज्यातर घरों में बिज़नेस का मतलब चाय और फल बेचना ही समझा जाता है !

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sarkari naukri – सरकारी नौकरी के लिए घुस देना

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मुझे याद है, जब मैं पटना के मोईनुल हक स्टेडियम में था! तब एक लड़के की बातें सुनकर मैं हैरान सा रह गया! जब उसने कहा – मैं पटना में 10 साल से रह रहा हूं! और अभी तक मेरी कोई नौकरी नहीं लगी है! उसने ये बातें इतनी नम्रता की भाव से कही कि मेरे आंखों से आंसू छलक पड़े! और साथ में ये भी सोच रहा था कि तू साला आखिर 10 साल तक किया क्या??? खैर इस तरह के कई लोग आपको बिहार में देखने को मिलेंगे।

कई लोगों से मिलने के दौरान मुझे पता चला, कि कुछ लोग इस कदर sarkari naukri/sarkari job के पीछे पागल हैं, कि वो 10- 15 लाख रुपए घूस देने को तैयार हैं। यहां ऐसी स्थिति है, खुद माता पिता ही घूस देकर अपने बेटे बेटियों को सरकारी नौकरी दिलवाने का प्रयास करते हैं। और वहीँ बिज़नेस में इन्वेस्ट करने के लिए पैसे माँगा जाय तो उनके प्राण अटकने लगते हैं! जिसकी वजह से लोगों में मानसिकता यह बैठ जाती है, कि सरकारी नौकरी लेलो और जीवनभर सुरक्षित रहो। इसलिए कुछ लोग बेफिक्र होकर अपनी ज़िन्दगी जीते हैं, माँ बाप तो हैं ही उनके ऊपर पैसे फेंकने को! कुछ लोग इसमें सफल होते हैं, और कुछ के पैसे और समय दोनों बर्बाद होते हैं! उस बन्दे के साथ भी ऐसा ही था।

सरकारी नौकरी का असली महत्व

सरकारी नौकरी का असली महत्व तब पता चलता है, जब उनकी बोली लगाई जाती है! एक बाज़ार का भाव नजर आता है! जब सरकारी नौकरी के अलग अलग विभाग के कर्मचरियों की शादी के समय अलग अलग नीलामी होती है! सबसे पहले तो आई एस के अधकारी को 50 लाख से 1 करोड़ के बीच दहेज मिलने का अनुमान होता है! बैंक और एसएससी के कर्मचारी 15-25 लाख, बिहार पुलिस 10-15 लाख, और ग्रुप डी वाले को 5-8 लाख मिलना तो तय है।

एक और सरकारी नौकरी के महत्व कि बात की जाए। तो सबसे महत्वपूर्ण औसत सरकारी नौकरी वाले की बीवी भी सुंदर देखने को मिलती है! ज्यादातर घरों में अपनी बेटी की लिए सरकारी नौकरी करने वाला ही दूल्हा ढूंढा जाता है! वहीं प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले चाहे उनकी आय महीने का 40 हजार ही क्यूं न हो! उसकी तुलना में 25 हजार वाले सरकारी नौकरी करने वाले की मांग ज्यादा रहती है!

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The sarkari naukri – सरकारी नौकरी की मज़बूरी

आज हमारे देश की हालत ऐसी है की लोग कितनी ही बड़ी डिग्रियां ले ले! किसी भी दूसरे सेक्टर में जाए, चाहे बीटेक करे या एमबीए या एमकॉम वापस उन्हें घुर फिर के सरकारी नौकरी के पीछे ही लगना पढ़ता है। मज़बूरी में कोई भी सरकारी नौकरी ही करनी पढ़ती है, क्यूंकि हमारे देश में नौकरी की जो किल्लत है! कुछ प्राइवेट कंपनियां में खून चूस-चूस कर काम कराया जाता है! और बदले में तनख्वाह 10 – 15 के बीच ही दिया जाता है! तो लोग यहां से भागने में ही अपनी भलाई समझते है।

आज स्थिति ऐसी है की सरकारी नौकरी में कोई भी पद पर लोग काम करने को मजबूर हैं! क्यूंकि इतनी मात्रा में लोग फॉर्म भरते हैं की सिर्फ 0.01 % की ही सेलेक्शन होती है! जहाँ 1 करोड़ लोग फॉर्म भरते हैं, वहीँ सीट केवल 50 हज़ार तक ही होती है! आप अनुमान कर सकते हो ‘हमारे देश की अर्धव्यवस्था’ की।

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3 Replies to “बिहार में सरकारी नौकरी का महत्व”

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